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जलागम प्रबंधन

24 Nov 2015

watershed-management-24122014

भूमि संसाधन विकास, ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा “जलागम प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी” पर चर्चा के लिए एक पहल की शुरुआत की गई थी जिस पर नागरिकों ने अपनी भारी प्रतिक्रिया दी। इस विषय पर हमें कई उपयोगी सुझाव और विचार प्राप्त हुए।

चर्चा में प्रतिभागियों का उत्साह देखकर यह ज्ञात हुआ कि सभी लोग देश में पानी की उपलब्धता के विषय को लेकर चिंतित हैं। उनमें से कुछ प्रतिभागियों द्वारा अत्यंत रोचक विचार और सुझाव पेश किए गए जिनमें से कुछ सुझावों का उल्लेख यहाँ किया जा रहा है।

जलागम प्रबंधन का पर्याय आज गरीबी उन्मूलन से लिया जाता है। अनेक लोगों द्वारा जलागम प्रबंधन के लिए सामुदायिक भागीदारी का सुझाव दिया गया है। उनके द्वारा समाज के सभी वर्गों को इस कार्य से जुड़ने का सुझाव भी दिया। साथ ही जलागम प्रबंधन के सिद्धान्तों पर चलते हुए जल संचयन के काम से जुड़े लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए भी सुझाव दिए गए। कृषि और बागवानी की सिंचाई में पानी का सदुपयोग करने के लिए सभी लोग ड्रिप सिंचाई के प्रयोग पर एकमत थे। उनमें से कुछ लोगों के द्वारा जल प्रयोग करने की पुराने तरीकों, बढ़ती मांग, भूमि उपयोग में परिवर्तन, और बदलते मौसम पर भी ध्यान परिलक्षित किया गया जिनके कारण जल प्रबंधन का खर्च लगातार बढ़ रहा हैं। इंजीनियर द्वारा सुझाए गए समाधान ‘प्राकृतिक बुनियादी सुविधाओं’ के साथ एकीकृत जल प्रबंधन कार्यनीतियों में निवेश करके जल प्रबंधन की लागत को कम किया जा सकता है, अधिक सेवाएँ प्रदान की जा सकती हैं और समुदायों एवं पर्यावरण दोनों को लाभान्वित किया जा सकता है।

सबसे अधिक ध्यान स्वस्थानी मिटटी की नमी को बचाने पर दिया गया। बांध निर्माण करने की तुलना में भूमि के स्वामित्व, समोच्च मेड़, नाली अवरोधक, ढालू भूमि का स्थिरीकरण इत्यादि विषयों को अधिक महत्व दिया गया। जलभृतों, कृषि भूमि में वर्षा जल का संरक्षण, जल संचयन के लिए कम लागत के ढांचों का निर्माण करना और तालाबों, कुण्डों और अन्य पारंपरिक जल संचयन के अतिक्रमण को रोकने के लिए भी कई सुझाव दिए गए। जलागम प्रबंधन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को साझा करने के सुझाव भी दिए गए।

जल प्रबंधन से जुड़े कई अन्य विषयों जैसे कि शहरों में वर्षा जल का संचयन, शहरों से स्रावित पानी का संग्रह कर उसका प्रयोग करना और देश को जोड़ने वाली नदियाँ इत्यादि विषयों पर भी सुझाव साझा किए गए जो कि जलागम प्रबंधन का हिस्सा नहीं थे।

हम नागरिकों द्वारा दिए गए सुझावों/विचारों को एक दस्तावेज़ के रूप में लाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। निश्चित ही यह सुझाव विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस कार्यक्रम को सकारात्मक रूप से प्रभावित करेंगे।

इस विषय पर चर्चा सितम्बर 2014 से की जा रही है और हमें दो हज़ार से अधिक सुझाव प्राप्त हुए है और नागरिकों द्वारा इस महत्वपूर्ण प्रयोजन हेतु काम भी किया गया है।

हमें आशा है कि आप अपनी भागीदारी इसी प्रकार बनाए रखेंगे और अपने विचारों और सुझावों द्वारा हमें अपना सहयोग देते रहेंगे। हम अपेक्षा करते है कि आगे भी प्रतिभागियों द्वारा चर्चा के विषयों पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा जिसके द्वारा आपके ज्ञान, अनुभव और सुझावों को उपयोगी तरीके से साझा किया जा सके।

इस चर्चा में भाग लेने के लिए सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद!

जलागम प्रबंधन दल, भूमि संसाधन विभाग

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कुल टिप्पणियां - 75

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  • Aaditya Badhan - 5 years ago

    If water harvesting is made compulsory in urban areas, for buildings having more than 1000 square feet roof area area, the shortage of water condition can be converted into water effluent conditions. This has already been experimented in case of Chennai city where the Honorable Collector has made it possible in transforming the water scarcity into water effluent city by making it compulsory BY LAW while giving permission to construct new buildings and implementing it on existing big buildings.

  • Manoj Kabre - 5 years ago

    Subject: Thought of the day : Save water

    The following states in India have only 20 % water of what they need : Rajasthan, Delhi, Hariyana, Punjab, Gujarat. As per the survey and analysis, by 2030, the water availability across the country will go down by 50 % – are we doing enough to safeguard ourselves against these facts ?

    any remedies and initiatives ?

    Thanks

    Manoj Kabre
    A citizen.

  • Abhishek Singh - 5 years ago

    keeping the need of community three types of watersheds should be constructed in a community ,one for harvesting rain water & pisciculture,another for community use ,other for the use of cattle .this will helpin recharging the ground water will reduce the cost of cleanliness will reduce harvesting of ground water ,will resolve the problem of water crisis.Facility of pump for rechargig the community pond.Community and cattle pond should be engineered in fashion that evacu of comm pond recharge c

  • Jay Chan - 5 years ago

    Regarding Land acquisition, to encourage farmers and Raise a slogan "Gaon bachao, kethi sudharo ,Yuva sashakth banao". Also open a Kisan centre for land aquisition mediation, settlement conferences, neutral evaluation, and arbitration. Also website, contact numbers 24×7 to hear to farmers local problems and to help with active consultation process.

  • Dilip Kumar Sane - 5 years ago

    Importance of ground water tanks, lakes, ponds and such water bodies in any development program. Unfortunately in none of the National Development Programs any serious consideration has been given to the Tanks, lakes and ponds etc. despite their importance in conservation of ecosystem and enhancement of environment. Every development project at all levels (village, town, city, Mega City or Smart City) must include plans for creation and/or restoration of tanks/ponds and large indigenous trees.

  • sathiya moorthy - 5 years ago

    Assume that there are 100 cores water bore well in India
    While they filling water tanks, Water overflows after exceed that capacity of tank then only people switch off their Water Bore well Motors
    Each time they fill u their tanks approx two bucket of water wasted when overflows. Let as assume people fill u their water tanks twice a day

    100 cores of bore well*2 times of usage=200cores times of usage in a single day
    200 crores of usage *2 bucket of wasted water = 400 cores of bucket water wasted

  • Bhaskar Polisetty - 5 years ago

    Learn from the past and Go Ahead. In Chennai, Govt implemented mandatory rain water harvesting for each household which drastically improved the ground water levels. Why can’t we implement this across the country and make it mandatory to have rain water harvesting for each household. We can help our farmers to handle the drought situation by increasing the ground water levels and sustain the water levels in the wells, canals and lakes and revers. Need to rush rather it is too late.

  • parmanand patel - 5 years ago

    in our area there is so much problem for agriculture purpose as well as drinking water but no one is trying to do any thing due to politics.my request to shri modiji to plzzz help us our farmers are doing sucide due to such sillyy reason plzzz help us our area mamache mohide taluka shahade district nandurbar plzzzz help us….

  • Neeraj Kohli - 5 years ago

    It is necessary to understand the anatomy and physiology of river system.
    It is possible by study of thematic maps, preparing the action plan and implement in each of the micro watersheds simultaneously which will rejuvenate ground water and in turn entire river system.

    We at International Association for Human Values founded by Sri Sri Ravi Shankar have been successfully working on such projects over last 2yrs. Our experts team is much sought after.

    +9199713566
    neeraj.kohli@iahv.org