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पारदर्शिता और विश्वसनीयता की नई पहचान “VVPAT”

22 Nov 2018

भारत एक लोकतांत्रिक देश है, देश की जनता ही यहां की सरकार को चुनती है। जिस पद्धति द्वारा सरकार का चयन करने के लिए लोग अपने-अपने क्षेत्र से लोकसभा और विधानसभा के लिए अपने प्रतिनिधि का चयन करते हैं उसे हम “चुनाव” कहते हैं। भारत में चुनाव “चुनाव आयोग” की देखरेख में संपन्न कराये जाते हैं। 1951 से 1952 के बीच हुआ पहला चुनाव “बैलेट बॉक्स” के माध्यम से ही कराया गया था। इस प्रक्रिया में कुछ खामियां थीं जिसकी वजह से चुनाव आयोग ने एक ऐसे सिस्टम की कल्पना की जिससे इन खामियों को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके इसीलिए चुनाव आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को प्राथमिकता दी।

विश्वसनीयता और पारदर्शिता की पहचान

जैसे-जैसे समय निकलता गया मतदाताओं का भरोसा ईवीएम पर लगातार बढ़ता गया लेकिन समय के साथ-साथ लोकतंत्र में पारदर्शिता लाने के लिए नये-नये उपकरणों का प्रयोग किया जाना भी अत्यंत आवश्यक हो जाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुये चुनाव आयोग ने तय किया कि भारत देश के लोकतंत्र को और मजबूत बनाने और विश्वसनीयता कायम रखने के लिये आने वाले चुनावों में “ईवीएम” के साथ “VVPAT” को भी जोड़ा जायेगा। इस महत्वपूर्ण कदम के बाद आने वाले सभी चुनाव पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न होंगे।

क्या है “VVPAT” ?

वोटर वेरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) एक तरह की मशीन है जिसे ईवीएम के साथ जोड़ा जाता है। वीवीपैट, ईवीएम का ही संशोधित रूप है। वीवीपैट की सहायता से किसी भी तरह की विवादास्पद स्थिति होने पर ईवीएम में पड़े वोट के साथ पर्ची का मिलान आसानी से किया जा सकता है।

“VVPAT” के फायदे

इसका फायदा यह है कि जब कोई भी नागरिक चुनाव के समय ईवीएम का इस्तेमाल करके अपना वोट डालता है तो इस मशीन में वह उस प्रत्याशी का नाम भी स्क्रीन पर देख सकता है जिसे उसने वोट दिया है। वीवीपैट मशीन के तहत वोटर विजुअली सात सेकंड तक यह देख सकेगा कि उसने जिसे वोट दिया है क्या वह वोट उसके ही प्रत्याशी को मिला है या नहीं। इस मशीन के जरिए मतदाता को प्रत्याशी का चुनाव चिन्ह और उसका नाम भी दिखाई देगा।

“VVPAT” का निर्माण किसने किया ?
चुनाव आयोग द्वारा चयनित दो बड़ी इलेक्ट्रॉनिक कंपनियां इसके निर्माण के लिये काम करती हैं। बैंगलोर में स्थित भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड तथा हैदराबाद स्थित इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड। वीवीपैट मशीन का निर्माण 2013 में हुआ था।

“VVPAT” का सबसे प्रथम प्रयोग कहां हुआ ?

सबसे पहले इसका इस्तेमाल 2013 में नागालैंड के चुनाव में किया गया था। चुनाव आयोग द्वारा जून 2014 में तय किया गया कि 2019 में होने वाले चुनावों में सभी मतदान केन्द्रों पर वीवीपैट का इस्तेमाल किया जाये।

आप सभी से अनुरोध है की अग्रिम चुनाव में अपने मत का प्रयोग अवश्य करें और वीवीपैट के उपयोग द्वारा पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा बनें।

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