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मन की बात की तीसरी वर्षगांठ मनाना

29 Sep 2017

2014 में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात की शुरूआत के साथ एक नई मिसाल रखी। दूरदराज क्षेत्रों में  प्रभाव के साथ एक पहल की शुरूआत हुई, मन की बात को प्रधानमंत्री ने शासन के दृष्टिकोण की ओर ले जाने वाले पहले कदमों में से एक के तौर पर माना जा सकता ये एक ऐसा माध्यम  बना , जिसके माध्यम से प्रधान मंत्री… राष्ट्र तक पहुंच सकते हैं और एक ऐसा मंच नागरिकों को भी मिला जिसकी मदद से लोग प्रधान मंत्री तक पहुंचने में सक्षम बने है। यह जन भागिदरी के कारण आगे बढ़ने के लिए एक निश्चित कदम के तौर पर मददगार होगा या कहें हो रहा है ।

मान की बात में  नागरिकों को माइगोव, पत्र, पीएम के ऐप के साथ-साथ आईवीआरएस के माध्यम से दर्ज किए गए कॉल के माध्यम से अपने विचारों और सुझावों को साझा करने का एक अवसर प्रदान करती है। इसकी स्थापना के बाद से ही  1.5 लाख से अधिक  टिप्पणियां  और पूरे देश से 6 लाख से अधिक कॉल के रूप में कई  नागरिकों के  विचार देखे गए हैं। पहला एपिसोड जो 3 अक्टूबर 2014 को प्रसारित हुआ था, । कुल मिलाकार  ये प्रधान मंत्री और नागरिकों के बीच संचार के साधन के रूप  में इसकी  स्थापना हुई है।

लोगों की प्रतिक्रिया और उत्साह के माध्यम से मन की बात का असर हो सकता है। पूरे देश में मन की बात में  उठाई गई आवाजें ,  जन आंदोलनों की शुरुआत  कर सकती है  और लोगों को अपने विचारों के साथ राष्ट्र निर्माण में भाग लेने के लिए प्रेरित भी कर सकती है । प्रधान मंत्री जी की ‘सेल्फी विथ बेटी’  हो या खादी उत्पादों का उपयोग करने वाली प्रोत्साहन की पहल दोनों ही दृष्टिकोणों को नागरिकों का समर्थन मिला है। मन की बात के माध्यम से, प्रधान मंत्री ने नागरिकों को उनके अभिनव विचारों और सुझावों के साथ सहभागी बनने के लिए  भी ना केवल प्रोत्साहित किया, बल्कि प्रेरित भी  किया। मन की बात  में अपने संबोधन के  दौरान प्रधान मंत्री ने उन भारतीय महिलाओं की सराहना  जिन्होंने खेल के जरिए देश का नेतृत्व किये साथ ही  उन्होंने स्वच्छ भारत के प्रति नागरिकों के प्रयासों की सराहना की।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों में, “जब आप अपनी राय देते हैं, इसका मतलब है कि आप राष्ट्रीय मुद्दों से चिंतित हैं और यह राष्ट्र की ताकत है। मैं आपका स्वागत करता हूं। “भारत जैसे एक विविधता वाले  देश में, प्रधान मंत्री तक पहुंचना  एक मुश्किल काम है।   इससे पहले कभी भी किसी भारतीय प्रधान मंत्री ने नागरिकों तक पहुंचने के लिए इतने सारे अवसर नहीं दिये और पहले कभी नागरिकों ने राष्ट्र-बिल्डरों के साथ अपने राष्ट्र-निर्माण विचारों को साझा नहीं किया। अपने सुझावों के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन चलाते हुए, नागरिकों के विचार प्रधान मंत्री की आवाज़ के माध्यम से करोड़ों  भारतीयों तक पहुंचते हैं।

ऐसा स्कूल बना जो वर्षा जल को बचाने के लिए 250 छोटे खाई खोले या एक 16 साल की लड़की के संकल्प के लिए जो शौचालय के लिए अपने परिवार के खिलाफ सत्याग्रह का शुभारंभ कर रहे थे – आज लोग , मन की बात के जरिए  ही ‘न्यू इंडिया’ के लिये  प्रेरणा भी दे रहे हैं।

क्या मन की बात को इसकी प्रासंगिकता विशेष और महत्वपूर्ण बनाता है,  प्रधान मंत्री ने हर भारतीय नागरिक के मुद्दों को संबोधित किया –मसलन परीक्षाओं से त्योहारों तक, दवाओं की कीमतों के मुद्दे से  लेकर किसान कल्याण की बात तक।  मन की बात न केवल विभिन्न विषयों पर प्रधान मंत्री के विचारों को बताती है बल्कि नागरिकों को भी आश्वासन देती है कि उनके विचारों को सुना और सुनाया जा रहा है।

मन की बात एक माध्यम है, जहां कोई विचार बड़ा या छोटा नहीं है, सभी विचारों को समान महत्व दिया जाता है… प्रधान मंत्री राष्ट्र की नब्ज के अनुरूप ही मुददों को मन की बात में उठाते रहे हैं। नागरिकों के ,जल संरक्षण, पर्यावरण या परीक्षा से संबंधित तनाव पर सवालों पर सुझाव दिया गया है – प्रेधान मंत्री ने मन की बात के जरिए इन सभी  मुद्दों या कहें विषयों को  लेकर संबोधित किया है।

मन की बात ने 3 सफल साल पूरे किए हैं, यह सभी नागरिकों को अपने विचारों और सुझावों के साथ योगदान करने के लिए एक यादगार के रूप में सेवा प्रदान करने जैसा है, क्योंकि हर आवाज का मतलब है… नागरिक  के विचार राष्ट्र के विकास के स्तंभ हैं, उनके सुझाव, चिंताओं और विचारों की भागीदारी ही  शासन की जड़ होती है और मन की बात सही मायने में  इस दौर में उत्प्रेरक के रूप में कार्य करती है।

जिन लोगों ने मेन की बात में योगदान दिया है

 

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