आठ सालों में कैसे सुधरा देश का स्वास्थ्य

MyGov Team
08 Jun 2022

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने आठ साल के कार्यकाल के दौरान ‘समग्र विकास’ की परिकल्पना को जमीन पर उतारा है। ‘सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण’ मोदी सरकार के शासन के मूल आधार रहे हैं। इसी कर्तव्य भावना से सैकड़ों पहलें हुईं, जिनसे गरीबों के जीवन में नई रोशनी आई है।

इन आठ सालों में हेल्थ सेक्टर में ऐतिहासिक क्रांति हुई है। 2017 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति लाकर देश के हेल्थ इकोसिस्टम को सही दिशा देना सुनिश्चित किया गया। मोदी सरकार ने ‘स्वस्थ भारत’ की बात की, तो उसमें सिर्फ दवा, अस्पताल और डॉक्टर ही नहीं हैं, बल्कि प्राथमिकता यह है कि नागरिक बीमार ही ना हों। इसके लिए योग और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

अगर कोई बीमार हो भी जाता है तो जांच और समयबद्ध उपचार की पूरी व्यवस्था है। मरीजों को मुफ्त दवा एवं डायग्नोस्टिक सेवा आज बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराई जा रही है। देश के 50 करोड़ से अधिक लोगों को साल का 5 लाख रुपये का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना मुहैया करा रही है। वहीं भारत का प्रभावी कोविड मैनेजमेंट और वैक्सिनेशन अभियान दुनिया के लिए एक मिसाल बन गया है। देश के 12 साल से अधिक आयु वाले सभी नागरिकों को दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान ‘सबको वैक्सीन, मुफ्त वैक्सीन’ के तहत 192 करोड़ से अधिक कोविड के टीके मुफ्त लग चुके हैं।

प्रधानमंत्री मोदी जी की पहचान पूरी दुनिया में ‘मेडिसिन मैन’ की बनी है। उनके प्रयासों के चलते देश में 8,700 से ज्यादा जन औषधि केंद्रों पर 1,000 से अधिक जेनरिक और गुणवत्तापूर्ण दवाएं बाजार कीमत से 50 से 90 प्रतिशत कम पर उपलब्ध हैं। पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज पर जोर था लेकिन हेल्थ ऐंड वेलनेस सेंटर्स के जरिए बचाव पर जोर दिया गया। आज देश में 1.18 लाख ऐसे सेंटर्स लोगों की सेवा कर रहे हैं। दिसंबर, 2022 तक पूरे देश में 1.5 लाख हेल्थ ऐंड वेलनेस सेंटर्स खोलने की योजना है।

लोगों के हेल्थ रेकॉर्ड को सही ढंग से रखने और इलाज की निर्णय प्रक्रिया को आधुनिक बनाने के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन कुछ ही समय में दुनिया का सबसे बड़ा सिस्टम बनने जा रहा है। कोविड से सबक लेते हुए मोदी जी ने प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन लॉन्च किया है। इस पर तकरीबन 65,000 करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है। हर जिले में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर तकरीबन 100 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है।

15वें वित्त आयोग से मोदी सरकार ने स्थानीय निकायों को सीधे पैसे देने की शुरुआत की है। एनडीए सरकार के कार्यकाल में एमबीबीएस सीटें 75 प्रतिशत बढ़कर तकरीबन 90,000 तो पोस्ट ग्रैजुएट की सीटें

दोगुनी होकर 60,000 से अधिक हो गई हैं। मेडिकल कॉलेज भी तकरीबन 600 और एम्स 6 से बढ़कर 22 हो गए हैं।

यह सर्वविदित है कि बीमारी और गरीबी का सीधा संबंध है। गरीबी हटानी है तो पहले बीमारी हटानी होगी। गरीबों को स्वस्थ जीवन देने के लिए करीब 10 करोड़ घरों में शौचालय बनाए गए। 2.6 करोड़ घरों को बिजली का मुफ्त कनेक्शन, 9.5 करोड़ से अधिक घरों में जल जीवन मिशन के तहत नल से पीने का स्वच्छ जल दिया गया। 9.17 करोड़ महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए । कोविड के दौरान गरीब भूखा न सोए, इसलिए तकरीबन 80 करोड़ लोगों को पिछले दो साल से अधिक वक्त से मुफ्त राशन दिया जा रहा है।

अमृत काल में मोदी जी के ‘सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण’ के मंत्र के साथ देश का स्वास्थ्य क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि इस विकास यात्रा में देश के 140 करोड़ लोग लाभान्वित हों। आने वाले 25 सालों में भारत दुनिया के लिए स्वास्थ्य सुविधा का केंद्र बने, उस दिशा में भी हम ‘हील इन इंडिया’ और ‘हील बाइ इंडिया’ पर काम कर रहे हैं। ‘स्वस्थ भारत’ केवल नारा नहीं, बल्कि गरीबों के प्रति मोदी सरकार की प्रतिबद्धता और जिद है।

(यह पहली बार द नवभारत टाइम्स में प्रकाशित हुआ था। इसके लेखक श्री मनसुख मंडाविया वर्तमान में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण एवं रसायन और उर्वरक मंत्री हैं।)

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