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Ankit Kukreja
06 Jul 2017

वर्तमान अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था काफी जटिलता भरी है, केन्द्रीय और राज्य सरकारों ने करों जैसे केन्द्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर, वैट, खरीद कर, केन्द्रीय बिक्री कर, प्रवेश कर, स्थानीय निकाय कर, नगर शुल्क, चुंगी शुल्क, विलासिता टैक्स, आदि जैसे बड़े कर लगाते हैं । इनमें से प्रत्येक एक स्वतंत्र कर है  सबके अलग अलग अनुपालन आवश्यकताएं हैं और अलग-अलग प्रावधान हैं। जाहिर है इतनी सारी टैक्सों के अलग अलग होने से जटिलताओं का सामना करन पड़ता है या कहें इससे जटिलता उत्पन्न होती है, साथ ही  करदाताओं को  इसका सही तरीके  से पालन करना मुश्किल होता है।  इसकी एक और वजह है  कि विभिन्न कर प्रणालियां भी एक दूसरे से जुड़े नहीं हैं, जो कर चोरी के लिए विभिन्न रास्ते प्रदान करती हैं। इस कर व्यवस्था को आसान बनाने के लिए, माल और सेवा कर (जीएसटी) 1 जुलाई 2017 से पूरे भारत में लागू किए जा रहे हैं । जीएसटी माल या सेवाओं की आपूर्ति या दोनों (समग्र आपूर्ति) पर लगाया जाएगा और सभी हितधारकों मसलन, नागरिक, करदाता, उद्योग और सरकार सबको इसका फायदा होगा

साधारणतया  जीएसटी के बाद या कहें जीएसटी के दौर में  राज्यों में  और अंतरराज्यीय लेनदेन दोनों के लिए समान कर दरें होंगी। जाहिर है इससे  व्यापार करने में आसानी होगी। एक समान जीएसटी दरों में पड़ोसी राज्यों के बीच दर मध्यस्थता को नष्ट करने और राज्य के अंदर, पड़ोसी राज्यों और अंतरराज्यीय बिक्री के बीच की चोरी के लिए प्रोत्साहनों को कम किया जाएगा या कहें खुद कम हो जाएंगे।

नए जीएसटी प्रणाली के बारे में विभिन्न हितधारकों के दिमाग में कई सवाल हैं। ब्लॉगों की यह श्रृंखला अगले कुछ दिनों में जीएसटी के विभिन्न पहलुओं की व्याख्या करेगी। जीएसटी से संबंधित किसी भी प्रश्न के लिए, आप यहां अपने  प्रश्नों को लिख सकते हैं और हमारी  जीएसटी टीम आपके प्रश्नों में भाग लेंगे। इस बीच, जीएसटी की प्रमुख विशेषताओं की व्यापक समझ के लिए कृपया नीचे  पढ़ सकते हैं । जीएसटी के मुख्य लाभ होंगे:

कैस्केडिंग का उन्मूलन:

जीएसटी मूल्य संवर्धन हर स्तर पर एकत्र किया जाएगा और और पिछले चरण में दिए गए कर का श्रेय लेन-देन के अगले चरण में कर का भुगतान करने के लिए उपलब्ध होगा। कुल मिलाकर यह करों के कैस्केडिंग को खत्म करेगा, इससे उपभोक्ता  को फायदा होदा और उके लिए  माल और सेवाओं की लागत कम हो जाएगी।

एक आम राष्ट्रीय बाजार का निर्माण:

भारत में जीएसटी  से  कर आधार बढ़ने, आम और समान प्रक्रियाओं के साथ  कर के दरों के माध्यम से अनुपालन में सुधार होने और  अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। जीएसटी अंतरराज्यीय आर्थिक बाधाओं को दूर करने के लिए एक स्ट्रोक पर आगे बढ़ेगा, जिससे एक सामान्य राष्ट्रीय बाजार का निर्माण होगा।

आसान अनुपालन:

जीएसटी के लागू होने मात्र से केंद्र, राज्य स्तर पर कानूनों, प्रक्रियाओं और करों के हर्जानाकरण, अनुपालन आसान और सरल बना देगा। सामान्य रूपों और प्रारूपों के अलावा, जीएसटी में जीएसटीएन पोर्टल के माध्यम से भी एक आम अनुपालन अ होगा। इससे बोर्ड भर में क्षमताएं और सहयोग मिलेगा। इससे प्रवेश कर और ई-कॉमर्स टैक्सेशन  को लेकर  होनेवाले जैसे विवादों से भी मुक्ति मिलेगी , उसे भी  आज हटा दिया जाएगा। समग्र परिणाम ये रहेगा कि अनुपालन लागत में कमी, कई रिकॉर्ड रखने और कई करों के लिए रिटर्न दाखिल करने की आवश्यकता  नही होगी , ऐसे में ,  व्यापर और उद्योग के लिए ये फायदे वाली बात होगी  और उनको फायदा भी बेहतर होगा।

मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा/ तेजी आएगी

जीएसटी भारत और भारत में ‘मेक इन इंडिया’ पहल को प्रमुख बढ़ावा देगा, इससे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मक रूप से भारत में उत्पादित  किए गए माल या सेवाओं के जरिए  किया जाएगा। आयातित वस्तुओं पर वर्तमान में प्रचलित काउंटर-सीलिंग ड्यूटी (सीवीडी) को एकीकृत कर (आईजीएसटी) द्वारा जीएसटी व्यवस्था के तहत बदल दिया जाएगा जो कि केंद्रीय जीएसटी + राज्य जीएसटी की कुल राशि है। जाहिर है इससे यह घरेलू और आयातित उत्पादों पर कराधान में समानता लाएगा और इससे घरेलू उद्योग को सुरक्षा प्रदान की जाएगी।

जीएसटी  के  दौर में निर्यात पूरी तरह से शून्य हो जाएगा, वर्तमान प्रणाली के विपरीत जहां केंद्र और राज्यों के बीच अप्रत्यक्ष करों के खंडित प्रकृति के कारण कुछ करों की वापसी की अनुमति नहीं है। इसका मतलब यह  होगा कि इनपुट आपूर्ति  का भुगतान आईटीसी निर्यातक के लिए उपलब्ध होगा, हालांकि अंतिम निर्यात आपूर्ति करने वाले को  कोई कर का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है। निर्यातकों को भी निर्यात आपूर्ति पर आईजीएसटी का भुगतान करने और उसी के लिए दावा वापसी का विकल्प है जिसके लिए एक फास्ट ट्रैक तंत्र उपलब्ध कराया गया है। इससे भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलेगा  साथ ही भुगतान स्थिति के संतुलन में सुधार होगा।

राजस्व में उछाल:

सरकार को उम्मीद है कि जीएसटी से टैक्स  की व्यवस्था करने और करदाता  के अनुपालन में सुधार करने से  राजस्व में उछाल  आएगी।  साथ  ही जीएसटी  की बदौलत ‘Ease of Doing Business Index’ में भारत की रैंकिंग में भी सुधार करेगी। इतना  ही नहीं  सरकार को ये विश्वास है कि जीएसटी के परिचय से 1.5% से 2% अतिरिक्त सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि हो सकती है । या कहें तो सरकार को जीडीपी में भी कुछ फीसदी के इजाफा की उम्मीद है ।

प्रौद्योगिकी आधारित कर प्रशासन:

जीएसटी की कार्यप्रणालि काफी हद तक प्रौद्योगिकी आधारित है, जाहिर है इससेन केवल निर्णय लेने में तेजी लाएगा, बल्कि पारदर्शिता के एक नए युग में प्रवेश भी करेगा। जीएसटी के अंतर्गत, करदाता और कर प्रशासन के बीच का व्यक्तिगत इंटरफ़ेस काफी कम हो जाएगा क्योंकि पंजीकरण, रिटर्न दाखिल, करों का भुगतान आदि जैसी अधिकांश कामकाज अब  आवश्यक रूप से ऑनलाइन के जरिए ही  की जाएंगी।

GSTN:

केन्द्रीय और राज्य सरकारों द्वारा संयुक्त रूप से प्रोन्नत जीएसटी नेटवर्क जो  कि गैर-लाभकारी, गैर-सरकारी कंपनी,  होगी वो केंद्र और राज्य सरकारों  के साथ साथ करदाताओं को भीआईटी इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए सेवा प्रदान करेगी। यह पूरे भारत में बिना किसी भेदभाव  के हर टैक्सपेयर के लिए एक समान इंटरफेस प्रदान करेगा।

इस पूरे प्रोसेस में आईटी की भूमिका काफी अहम होगी । आप ये कह सकते हैं कि वह पूरे प्रोसेस में मेरूदंड की तरह का काम करेगा।  मसलन  आईटी  करदाताओं, राज्य और केंद्र सरकारों, बैंकों, आरबीआई और अन्य हितधारकों के बीच के कामकाज को प्रसंस्करण और विनिमय सूचना को सक्षम बनाएगा। एक तरह सेअप्रत्यक्ष कर प्रशासन को सुदृढ़ करेगा और इसके कार्यप्रणाली को बढ़ावा देगा।

छोटे करदाताओं के लिए विशेष लाभ:

विशेष व्यवस्था के तहत ही कर के भुगतान के संबंध में छोटे कर दाताओं को जीएसटी में विशेष लाभ प्रदान किया गया है। एक छोटा करदाता जिसका  कि कुल कारोबार  20 लाख (पूर्वोत्तर राज्यों, सिक्किम, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के लिए 10 लाख) को जीएसटी के तहत पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है।  मतलब ये कि  तय  सीमा के नीचे वाले स्वेच्छा से पंजीकरण कर सकते हैं और आवश्यक जीएसटी का भुगतान कर सकते हैं और इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठा सकते हैं।

20 लाख/ 10  लाख की तय सीमा से ऊपर के टैक्सपेयर  जिनका टर्नओवर पिछले साल 75 लाख से कम था ( पूर्वोत्तर राज्यों,.,सिक्किम , और हिमाचल प्रदेश में 50 लाख )  उनके लिए  टर्नओवर और सरलीकृत अनुपालन आवश्यकताओं से जुड़ी एक एकल  और कम कर दर के साथ संयोजन लेवी योजना  लेने का विकल्प है(त्रैमासिक रिटर्न )

घरेलू मांग को बढ़ावा देना:

जीएसटी के तहत, अधिकांश सामानों पर औसत कर का बोझ कम होने की संभावना है, जिससे कीमतों में कमी आ जाएगी, जिसके परिणामस्वरूप अधिक खपत होती है। साथ ही इससे घरेलू मांग को बढ़ावा मिलेगा लिहाजा  जीएसटी घरेलू व्यवसाय के लिए अधिक अवसर पैदा करेगा और नौकरी सृजन शुरू करेगा।

जीएसटी का सबसे बड़ा लाभ  ये होगा कि  वह भारत को ‘एक राष्ट्र, एक कर, एक बाजार’ में परिवर्तित कर देगा। जीएसटी भारतीय व्यापार और उद्योग को भी स्थिर होने में मदद करेगा  और हमारी पूरी आर्थिक क्षमता को समझने में  मददगार साबित होगा

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