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मध्यप्रदेश लोक सेवा प्रबंधन विभाग – लोक सेवाओं के बेहतर प्रदाय के लिए निरंतर प्रतिबद्ध

26 Sep 2018

साल 2010 में देश में पहली बार मध्यप्रदेश सरकार ने अपने नागरिकों को लोक सेवाओं के प्रदाय की गारंटी देकर एक बड़ा कदम उठाया है। इस कदम के उपरान्त लोगों को लोक सेवा प्रदाय के इस मॉडल पर भरोसा दिलाना एक बड़ी चुनौती थी… कब होगा, कैसे होगा, क्या सच में ये हो पायेगा, होगा तो क्या ये प्रभावी होगा, क्या सिस्टम इतना चुनौतीपूर्ण काम कर सकेगा? ऐसे अनेकों सवाल इस प्रक्रिया को समझने वालों के मन में थे, लेकिन दूसरी तरफ शासन और प्रशासन किसी भी तरह से अपनी इस प्रतिबद्धता को साकार करने के लिए दृढ संकल्पित था। इस चुनौती को बेहतर टीम वर्क, आवश्यक तकनीकी इन्फ्रास्ट्रक्चर और संवेदनशीलता के साथ करने के प्रयास शुरू किए गए।

निश्चित ही साल 2010 से अब तक लोक सेवा गारंटी कानून ने एक लम्बी दूरी तय की है, इस लम्बे सफ़र के दौरान न सिर्फ नागरिकों का भरोसा हासिल किया गया बल्कि सेवा प्रदाय की प्रक्रिया में व्यापक परिवर्तन भी किये। सेवा प्रदाय प्रक्रिया में परिवर्तन अब भी एक बड़ी चुनौती थी, जिसमें सम्बंधित विभाग की सहमति और उस विभाग में तकनीकी समन्वय क्षमता का होना आवश्यक था। विभिन्न पोर्टल से समन्वय और डाटा शेयरिंग संभव होने से सेवाओं में दस्तावेज और सेवा प्रदाय के लिए समय सीमा में भी काफी कमी आई।

अब चिन्हित सेवाओं को प्राप्त करने के लिये आम जन किसी की इच्छा पर निर्भर नहीं हैं क्योंकि शासन की तरफ से नागरिकों को सेवा प्राप्त करने की गारंटी दी गई है। सेवाएं प्राप्त करना अब नागरिकों का अधिकार है, इसके साथ ही लोक सेवा प्रदान करने में कोताही बरतने वाले अधिकारियों पर अर्थदण्ड आरोपित करने का प्रावधान भी इस अधिनियम में किया गया है। हम कह सकते हैं कि यह कानून बनाकर आमजन के याचना भाव को वैधानिक शक्ति में बदल दिया गया है।

उद्देश्य यह भी है कि प्रशासन से जनता के जो दैनंदिन के कार्य होते हैं उन्हे पूरा करने के लिये लोक सेवक सतर्क रहे और सेवा प्रदान करने के लिये उपने उत्तरदायित्व का प्रभावी निर्वहन करे। इसलिये प्रत्येक चिन्हित सेवा प्रदान करने के लिये समय-सीमा निर्धारित की गई है। मध्यप्रदेश देश का प्रथम राज्य है जिसने अधिसूचित सेवाओं को समय-सीमा में नागरिकों को प्रदान करने की कानूनी गारंटी दी है। हमारे बाद 20 अन्य राज्यों ने भी ऐसे कानून बनाये हैं अब भारत सरकार भी इस तरह का कानून बना रही है। निश्चित ही यह कानून सरकार की जन प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

लोक सेवा गारंटी अधिनियम-2010 की विशेषताएं

● सर्वप्रथम 9 विभागों की 26 सेवाओं को इस अधिनियम के दायरे में रखा गया था। जिन्हें अब तक बढ़ाकर कुल 45 विभागों की 448 सेवाओं को अधिनियम के दायरे में लाया गया है।
● वर्तमान में अधिसूचित 448 सेवाओं में 263 सेवाओं के ऑनलाईन आवेदन लिये जा रहे हैं।
● इन सेवाओं को प्रदान करने के लिये निश्चित समय-सीमा निर्धारित की गई है। इस समय-सीमा में पदाभिहित अधिकारी को यह सेवा प्रदान करनी होगी।
● समय-सीमा में कार्य न करने अथवा अनावश्यक कारणों से विलम्ब करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को दण्ड देने का प्रावधान है।
● दोषी अधिकारी-कर्मचारियों पर 250 रूपये से लेकर 5000 रूपये तक के दंड की व्यवस्था की गई है। दण्ड के रूप में मिलने वाली राशि का एक अंश पीड़ित व्यक्ति को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाती है।
● इस कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिये मध्यप्रदेश शासन द्वारा पृथक से ”लोक सेवा प्रबंधन विभाग” एवं विभाग के अधीन ”राज्य लोक सेवा अभिकरण” का गठन किया गया है।
● नागरिकों को बेहतर एवं सरलतापूर्वक सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से प्रत्येक विकासखण्ड एवं नगरीय क्षेत्र में कुल 412 लोक सेवा केन्द्र की स्थापना की गई है, जिनका सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है।
● इस अधिनियम अर्थात नागरिक सेवाओं को मान्यता प्रदान करने के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष 25 सितम्बर को ‘लोक सेवा दिवस’ मनाया जाता है।

विभाग की महत्वपूर्ण उपलब्धियां

1. लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2010 एवं इसके सफल क्रियान्वयन के लिए लोक सेवा प्रबंधन विभाग को वर्ष 2012 में UN अवार्ड, वर्ष 2013 में Skoch अवार्ड, 2014 में स्टेट आईटी ई-गवर्नेंस अवार्ड एवं वर्ष 2018 में ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना क्रियान्वयन के लिए “Gems of Digital” अवार्ड प्राप्त हो चूका है।

2. इस अधिनियम के अंतर्गत अधिसूचित सेवाओं को ऑनलाईन प्रदान करने हेतु अब तक मध्यप्रदेश में कुल 12 हजार से भी अधिक अधिकारियों के डिजिटल सिग्नेचर बनवाये गए है।

3. सेवाओं को ऑनलाईन प्रदान करने के तहत कई सेवाओं के ऑनलाईन डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट प्रदान किये जा रहे है। यह समस्त डिजिटल हस्ताक्षरित सर्टिफिकेट एवं कॉमन रिपॉजिटरी वेबसाइट www.mpedistrict.mp.gov.in पर उपलब्ध है। (उदा.- मूल निवासी, आय प्रमाण, जाति प्रमाण पत्र)

4. अधिनियम के अंतर्गत अधिसूचित विभागों के जिला एवं ब्लाक स्तर कार्यालय तक स्वान कनेक्टिविटी उपलब्ध करने एवं राजस्व कार्यालय में कम्प्यूटर उपलब्ध कराये जा रहे है।

विभाग द्वारा जनहित में लिए गए निर्णय

Government Process Re-Engineering (GPR) के अन्तर्गत शासकीय प्रक्रियाओं के सरलीकरण एवं पुर्निधारण हेतु मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय साधिकार समिति में विभाग ने सेवा प्रदाय की प्रक्रिया को काफी सरल करने के उद्देश्य से निम्नानुसार सेवाओं के सरलीकरण पर प्रस्ताव रखा जिस पर समिति द्वारा निर्णय लिया गया-
(i) स्व घोषणा पत्र के आधार पर स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र एवं आय प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था को प्रारंभ किया गया ।
(ii) शपथपत्र के स्थान पर स्वप्रमाणित घोषणा-पत्र के आधार पर सेवाओं का प्रदाय।

जाति प्रमाण पत्र अधिनियम

लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2010 के अंतर्गत सामान्य प्रशासन विभाग की ”जाति प्रमाण पत्र प्रदाय” को वर्ष जुलाई 2014 से अभियान के तहत लोक सेवा केन्द्रों द्वारा प्रदेश भर के स्कूलों के छात्र छात्राओं को जाति प्रमाण पत्र प्रदान करने संबंधी अभियान का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया गया । अभियान के तहत अब तक लगभग 1.44 करोड़ आवेदन प्राप्त हुये जिसमें से लगभग 1.24 करोड़ डिजिटल हस्ताक्षरित रंगीन प्रमाण-पत्र प्रदान किये जा चुके हैं । जारी किये गए सभी डिजिटल हस्ताक्षरित सर्टिफिकेट एक कॉमन रिपॉजिटरी वेबसाईट www.mpdistrict.gov.in पर उपलब्ध है ।

इस अभियान के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के निम्नानुसार विवरण के अनुसार हितग्राही लाभान्वित हुए –

अनुसूचित जाति 24.55 लाख से अधिक
अनुसूचित जनजाति 37.31 लाख से अधिक
अन्य पिछड़ा वर्ग
62.01 लाख से अधिक

एम.पी.ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से लोक सेवाओं का प्रदाय

प्रदेश के नागरिकों को शासन से संबंधित अधिक से अधिक सेवाएं समय-सीमा में सरलतापूर्वक आसानी से प्राप्त हो, यह ध्यान में रखते हुए शासन की नवीन नीति के अनुसार लोक सेवा केन्द्रों के माध्यम से दी जाने वाली सभी सेवाएं एम.पी.ऑनलाईन कियोस्क के माध्यम से तथा एम.पी.ऑनलाइन की चिन्हित सेवाएं लोक सेवा केन्द्रों के माध्यम से प्रदाय की जाएंगी। जिसके लिए एम.पी.ऑनलाईन कियोस्क को भी लोक सेवा गारंटी के अन्तर्गत अधिसूचित सेवाओं को देने हेतु अधिकृत किया गया है । इन कियोस्क के माध्यम से लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत चयनित अधिसूचित ऑनलाईन सेवाएं प्रदाय की जायेगी। दिनांक 01 सितम्बर 2016 से एम.पी. ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर प्रदाय की जाने वाली चयनित सेवाएं एम.पी. ऑनलाईन पोर्टल से तथा एम.पी.ऑनलाईन कियोस्क द्वारा प्रदाय की जाने वाली चयनित सेवाओं को एम.पी. ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल से प्रदाय किया जाना प्रारंभ किया गया है ताकि नागरिकों को उनके निवास स्थान के नजदीक इन सेवाओं का लाभ प्राप्त हो सके। इसके अतिरिक्त सेवाओं के प्रदाय हेतु नवीन पेमेंट गेटवे भी प्रारंभ किया गया है। इस निर्णय से 412 लोक सेवा केन्द्रों के अतिरिक्त एम.पी.ऑनलाईन के कियोस्क के द्वारा भी लोक सेवाएं प्रदाय की जा रही है।

समाधान एक दिन-तत्काल प्रदाय सेवा

नागरिकों को एक दिन में सेवा उपलब्ध कराने की दृष्टि से मध्य प्रदेश शासन द्वारा ‘’समाधान एक दिन-तत्काल सेवा व्यवस्था’’ फरवरी 2018 से प्रारंभ की गई है। इसके अंतर्गत विभिन्न विभागों की 34 प्रमुख सेवाओं को एक कार्य दिवस में ही प्रदाय किया जा रहा है। इसे क्रियान्वित करने के लिए एक बड़े प्रशासनिक निर्णय में सबसे महत्वपूर्ण हर लोक सेवा केंद्र पर एक जिम्मेदार अधिकारी की तैनाती है। शासन ने इस योजना के क्रियान्वयन के लिए हर लोक सेवा केंद्र पर एक राजपत्रिक अधिकारी की तैनाती की है। ‘समाधान एक दिन-तत्काल सेवा व्यवस्था’ के अंतर्गत अब तक कुल 34.59 लाख से अधिक नागरिक लाभांवित हुये हैं। इस सेवा के तहत प्रदाय किये जाने वाले डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाण-पत्र व्हाटसएप के माध्यम से भी आवेदकों को भेजे जा रहे हैं ताकि वह अपनी सुविधा अनुसार उसे डाउनलोड कर उसका उपयोग कर सके। अब तक 8.29 लाख से अधिक नागरिकों को व्हाटसएप के माध्यम से प्रमाण-पत्र प्रेषित किये जा चुके हैं।

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