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स्वर्णिम स्नो फेस्टिवल

31 Mar 2021

हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में 75 दिनों तक चले स्वर्णिम स्नो फेस्टिवल में जिला की परंपरा, रीति-रिवाजों और संस्कृति की झलक देखी गई। लाहौल-स्पीति की कई पंरपराएं ऐसी भी हैं जो धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर हैं। ऐसे में स्थानीय प्रशासन एवं जनता ने स्वर्णिम स्नो फेस्टिवल में आमजन को जिले की प्राचीन पंरपराओं से रूबरू करवाने का सफल प्रयास किया। घाटी में देश के सबसे लंबे स्नो फेस्टिवल का शुभारंभ प्रदेश के आईटी मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा जी ने विधिवत शुभारंभ किया। यह कहना लाजमी होगा कि हर वर्ष स्नो फेस्टिवल के आयोजन से लाहौल के पर्यटन को संजीवनी मिलने सहित जनजातीय संस्कृति को संरक्षित करने और समृद्ध संस्कृति एवं परंपराओं को बढ़ावा मिल सकेगा। विशेष यह है कि अटल टनल, रोहतांग के निर्माण से अब वर्षभर लाहौल घाटी के लिए मार्ग खुला रहता है। ऐसे में सर्दियों में होने वाले इस अहम महोत्सव का लुत्फ उठाने पर्यटक आसानी से लाहौल-स्पीति पहुंच सकेंगे।

रोमांचक व मनमोहक गतिविधियों का किया भव्य आयोजन

लाहौल-स्पीति में स्वर्णिम स्नो फेस्टिवल के अंतर्गत विभिन्न स्पर्धाओं एवं गतिविधियों का आयोजन किया गया। इनमें विशेष रूप से दाछांग उत्सव, स्नो प्रिन्स व प्रिन्सेज ऑडिशन, तीरंदाजी स्पर्धा, एमटीबी साइकलिंग रेस, हस्तशिल्प कार्यशाला व सांस्कृतिक लोकनृत्य सहित विभिन्न गतिविधियों का रोमांचक एवं मनमोहक आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्नो फेस्टिवल में आकर्षण का केंद्र बन रहे।

पारंपरिक व्यंजनों से महका स्नो फेस्टिवल

स्नो फेस्टिवल में स्थानीय पारंपरिक व्यंजनों की काफी महक रही। यहां फूड फेस्टिवल के तहत स्थानीय नागरिकों द्वारा शाकाहारी व मांसाहारी व्यंजनों के स्टॉल लगाए गए, जिनमें काफी भीड़ देखी गई। यहां की छरमा एवं नमकीन चाय, चिलड़ा, टीमो, मर्चु इत्यादि व्यंजनों की काफी डिमांड रही।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुआ स्नो फेस्टिवल का समापन

मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर जी ने 29 मार्च को शिमला से वर्चुअल माध्यम द्वारा लाहौल-स्पीति जिले के स्नो फेस्टिवल के समापन समारोह की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री ने कहा यह महोत्सव इस जनजातीय जिला की समृद्ध एवं विविध सांस्कृतिक परंपराओं व पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। महोत्सव के माध्यम से विलुप्त होती जा रही कुछ परंपराओं को पुनर्जीवित करने और दुनिया के सामने प्रदर्शित करने में मदद मिली है। इससे विश्वभर के पर्यटक घाटी में भ्रमण के लिए प्रेरित होंगे और उन्हें जनजातीय संस्कृति और वेशभूषा की झलक देखने को मिलेगी। स्नो फेस्टिवल ने 75 दिनों तक मनाए जाने वाले दुनिया के सबसे लंबे महोत्सव का गौरव हासिल किया है।

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