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स्वास्थ्य के क्षेत्र में मध्य प्रदेश ने कर दिखाया कुछ ऐसा, जिसके बारे में जानकर खुशी होगी आपको

18 Jan 2019

हर नागरिक चाहता है कि उसके क्षेत्र में स्वास्थ्य से संबंधित सर्व-सुविधायें उपलब्ध हों ताकि वह अपना और अपने परिजनों का इलाज समय पर करा सके। समाज का एक तबका ऐसा भी है जो आर्थिक तंगी से परेशान है और बड़ी बीमारियों का इलाज कराने से वंचित रह जाता है। नागरिकों की इन्हीं समस्याओं को देखते हुये इंदौर के एमवाय (महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय) अस्पताल की चौथी मंजिल पर तैयार बोनमेरो ट्रांसप्लांट यूनिट में पहला ट्रांसप्लांट किया गया।

ऑपरेशन तीन साल से मल्टीपल मायलोमा से पीड़ित शहर के 35 वर्षीय युवक का किया गया, उसे उसका ही बोनमेरो ट्रांसप्लांट किया गया।

इस मामले में देश का पहला ऐसा राज्य बना मध्य प्रदेश

अभी तक मध्य प्रदेश के किसी भी शासकीय या निजी अस्पताल में बोनमेरो ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। मध्य प्रदेश पूरे देश में पहला ऐसा राज्य है जहां मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में इस तरह की सुविधा मरीजों को दी जा रही है।

नि:शुल्क मिलेगा इलाज
एमवायएच में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले मरीजों के लिए यह ऑपरेशन पूरी तरह से नि:शुल्क है, जबकि दूसरे वर्ग के मरीजों को यह सुविधा चार से पांच लाख में उपलब्ध कराई जा रही है।

5 करोड़ की लागत से बना सेंटर
बोनमेरो ट्रांसप्लांट सेंटर को बनाने में लगभग पांच करोड़ की लागत आई है। बोनमेरो ट्रांसप्लांट के लिए मरीजों को अभी प्रदेश के बाहर के अस्पतालों में जाना पड़ता था, जिसका खर्च लगभग 20 से 25 लाख रुपए आता है लेकिन अब एमवायएच अस्पताल में यह ऑपरेशन मात्र 4 से 5 लाख रुपए में ही किया जा रहा है।

फरवरी तक ट्रेनिंग होगी पूरी
चिकित्सा महाविद्यालय, इंदौर के दो शिशुरोग विशेषज्ञों को छह माह की बोनमेरो ट्रांसप्लांट की ट्रेनिंग के लिए राज्य शासन द्वारा न्यूयार्क, अमेरिका भेजा गया है। चिकित्सकों की ट्रेनिंग फरवरी तक पूरी हो जाएगी, जिसके बाद चिकित्सक अपनी सेवाएं अस्पताल में प्रदान कर पाएंगे। यूनिट स्थापित होने के बाद विशेषज्ञों के साथ चयनित बच्चों के बोनमेरो ट्रांसप्लांट भी किये जाएगें।

क्या है बोनमेरो ?

बोनमेरो मनुष्य की हड्डियों के अंदर भरा हुआ एक मुलायम टिशू होता है। जहां से रक्त का उत्पादन होता है। एक व्यस्क के शरीर में बोनमेरो का भार लगभग 2.6 किलोग्राम होता है। बोनमेरो रक्त कोशिकाओं का उत्पादन करने वाली स्टेम कोशिकाओं से भरी रहती है जो लाल, सफेद कोशिकाओं और प्लेटलेट्स को विकसित करती है।

ऐसे होता है ट्रांसप्लांट

बोनमेरो ट्रांसप्लांट के लिए सबसे पहले डोनर के गाल के अदरुनी हिस्से से सॉफ्ट टिश्यू निकाला जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह का कोई दर्द नहीं होता है। स्टेम सेल्स का उचित मिलान होने पर डोनर का पूरा मेडिकल चेकअप किया जाता है और उस मेडिकल चेकअप के द्वारा उससे जुड़ी पूरी जानकारी दी जाती है। इसके बाद डोनर की हड्डी में बिना छेद किए परिधीय रक्त को स्टेम सेल्स की मदद से निकाला जाता है। डोनर को 4 से 5 दिन के लिए पीसीएस थैरेपी दी जाती है। ऐसा करने से बोनमेरो में जरूरत से अधिक स्टेम कोशिकाओं का उत्पादन होने लगता है। यह सारी थैरपी सुपरवाइजर की देखरेख में ही होती है। इस प्रक्रिया में लगभग 4 से 8 घंटे लगते हैं।

रजिस्ट्रेशन के लिये लगाये गए केम्प
बोनमेरो ट्रांसप्लांट सेंटर में थेलेसिमिया से ग्रसित मरीजों का उपचार किया जाएगा। बोनमेरो ट्रांसप्लांट हेतु मरीजों के रजिस्ट्रेशन के लिये इंदौर, भोपाल और ग्वालियर में केम्प का आयोजन भी किया गया था। अब तक प्रदेश में 150 थेलेसिमिया मरीजों का रजिस्ट्रेशन बोनमेरो ट्रांसप्लांट के लिये किया जा चुका है। अगले चरण में ऐसी ही सुविधा भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में भी शुरु करने की भी योजना है।

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