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POCSO e-box आपके बच्चे को रखे सुरक्षित, अपराधियों को सिखाये सबक…

09 Jul 2018

कहा जाता है बच्चे भगवान का रूप होते हैं तो फिर हम यह क्यों भूल जाते हैं कि बच्चों के साथ किसी तरह का गलत व्यवहार उनके जीवन को अंधेरे में धकेल सकता है। बच्चों को मानसिक और शारीरिक तौर पर कई तरह की दिक्कतों से होकर गुजरना पड़ सकता है। अपराधी नियम-कानून को ताक पर रखकर मासूमों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करते हैं। बच्चों के साथ छेड़छाड़, रेप, यौन उत्पीड़न, यौन शोषण और पोर्नोग्राफी जैसे जघन्य अपराधों पर रोक लगाने के लिये राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा POCSO e-box प्रारंभ किया गया है।

यदि आपके बच्चों को कोई गलत तरीके से छूता है, गलत हरकतें या गन्दी बातें करता है और उन्हें गन्दी तस्वीरें दिखाता है तो बच्चे बिना किसी को बताये स्वयं ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दिला सकते हैं।

माता-पिता भी अपने बच्चों को POCSO e-box के बारे में बताएं और उन्हें जागरूक बनाएं, यह हमारा कर्तव्य बनता है कि हम बच्चों की मदद करें, शोषण का शिकार होने से अपने बच्चों को बचाएं और दोषियों को POCSO एक्ट के तहत सज़ा दिलाएं।

इन घटनाओं पर लगाम लगाने के लिये केंद्र और राज्य सरकारें लगातार प्रयासरत हैं। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा POCSO एक्ट (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल ऑफेंसेस) में संशोधन किया गया है :-

1. 12 साल की कम उम्र की बच्ची से रेप या गैंगरेप के दोषी को फांसी की सजा का प्रावधान है।
2. 12 साल से अधिक और 16 साल से कम उम्र की लड़कियों से रेप या गैंगरेप के मामले में आजीवन कारावास का प्रावधान रखा गया है।
3. महिलाओं के साथ बलात्कार पर आजीवन कारावास की सज़ा का प्रावधान है।
4. नए संशोधन के तहत रेप के मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी।
5. रेप के मामलों के ट्रायल को भी दो महीने में ही पूरा किया जाएगा।
6. रेप के मामले में निचली अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में अपील की समय सीमा 6 महीने होगी।
7. रेप या गैंगरेप के मामले में आरोपियों को अग्रिम जमानत देने का कोई प्रावधान नहीं है।

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा इस संबंध में कड़ा कानून लागू किया गया है जिसमें 12 साल की उम्र तक की बालिकाओं के साथ बलात्कार या सामूहिक बलात्कार करने वाले अपराधियों को फांसी की सजा देने का प्रावधान किया गया है। महिलाओं के प्रति अपराधों की रोकथाम के लिए इस तरह का कठोर कानून बनाने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है।
POCSO एक्ट लड़के और लड़की को समान रूप से सुरक्षा प्रदान करता है। इस कानून के तहत पंजीकृत होने वाले मामलों की सुनवाई भी विशेष अदालत में की जाएगी। बच्चों के प्रति यौन उत्पीड़न, यौन शोषण और पोर्नोग्राफी जैसे जघन्य अपराधों को रोकना ही हमारा कर्तव्य है।

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