जन-केंद्रित शासन: सहभागिता, तकनीक और पारदर्शिता की भारतीय लोकतांत्रिक यात्रा

Team MyGov
January 29, 2026

भारत का लोकतंत्र समय के साथ निरंतर विकसित हुआ है। विगत एक दशक में शासन व्यवस्था के क्षेत्र में जो परिवर्तन दृष्टिगत हुआ है, वह केवल प्रशासनिक सुधारों तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन और नागरिकों के संबंधों को अधिक सहभागितापूर्ण, उत्तरदायी और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आज का भारत जन-केंद्रित शासन की उस अवधारणा को सुदृढ़ कर रहा है, जिसमें नागरिक केवल योजनाओं के लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति-निर्माण और लोकतांत्रिक विमर्श की प्रक्रिया में सक्रिय सहभागी हैं।

संविधान में निहित लोकतांत्रिक मूल्यों—समानता, समावेशन और सामाजिक न्याय—के अनुरूप शासन को अधिक संवेदनशील और नागरिक-अनुकूल बनाने के प्रयास निरंतर किए गए हैं। विकास की प्रक्रिया को व्यापक और समावेशी बनाने की दृष्टि से यह आवश्यक है कि शासन व्यवस्था समाज के प्रत्येक वर्ग की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं को प्रतिबिंबित करे।

जनभागीदारी: लोकतंत्र की आधारशिला

लोकतंत्र की सशक्तता केवल आवधिक निर्वाचन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सतत संवाद और नागरिक सहभागिता से ही लोकतांत्रिक संस्थाएँ सुदृढ़ होती हैं। इस उद्देश्य से MyGov जैसे मंचों के माध्यम से नागरिकों को नीति-निर्माण, परामर्श और सुझाव देने का अवसर प्रदान किया गया है।

मन की बात, परीक्षा पे चर्चा, राष्ट्रीय नीतियों पर सार्वजनिक परामर्श तथा बजट पूर्व सुझाव जैसी पहलें शासन और जनता के बीच संवाद को संस्थागत रूप प्रदान करती हैं। इन प्रयासों से नीति-निर्माण प्रक्रिया अधिक व्यावहारिक, समावेशी और जनोन्मुखी बन सकी है, जो लोकतांत्रिक शासन की भावना को सुदृढ़ करती है।

तकनीक: सुशासन का सक्षम माध्यम

आधुनिक प्रौद्योगिकी ने शासन को अधिक कुशल, पारदर्शी और सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डिजिटल इंडिया के अंतर्गत विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से सेवा वितरण को सरल और प्रभावी बनाया गया है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) जैसी व्यवस्थाओं ने यह सुनिश्चित किया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र नागरिकों तक समयबद्ध रूप से पहुँचे।

आधार, UPI, डिजिलॉकर और को-विन जैसे डिजिटल माध्यम प्रशासनिक दक्षता, वित्तीय समावेशन और नागरिक सुविधा के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान डिजिटल प्रणालियों की प्रभावशीलता ने यह सिद्ध किया कि तकनीक सुशासन को सुदृढ़ करने का एक सक्षम साधन बन सकती है।

पारदर्शिता और जवाबदेही: लोकतांत्रिक विश्वास का आधार

जन-केंद्रित शासन की मूल भावना पारदर्शिता और जवाबदेही में निहित है। ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन सेवाएँ, समयबद्ध सेवा-प्रदान और निगरानी तंत्रों ने प्रशासन को अधिक उत्तरदायी बनाने में योगदान दिया है।

जब शासन की प्रक्रियाएँ स्पष्ट होती हैं और जानकारी नागरिकों के लिए सुलभ होती है, तो शासन के प्रति विश्वास और संस्थागत विश्वसनीयता सुदृढ़ होती है। यही विश्वास लोकतंत्र की स्थिरता और प्रभावशीलता का मूल आधार है।

सेवा, सुशासन और सामाजिक समावेशन

स्वच्छ भारत अभियान, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी पहलें यह दर्शाती हैं कि शासन का उद्देश्य केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि गरिमा, समान अवसर और सामाजिक सुरक्षा के साथ विकास सुनिश्चित करना है। इन पहलों के माध्यम से समाज के वंचित और कमजोर वर्गों तक मूलभूत सुविधाएँ पहुँचाने का प्रयास किया गया है।

जन-केंद्रित शासन भारत की लोकतांत्रिक परंपरा का आधुनिक विस्तार है। नागरिक सहभागिता, तकनीक का सार्थक उपयोग और पारदर्शिता—ये तीनों तत्व मिलकर शासन को अधिक उत्तरदायी, समावेशी और प्रभावी बना रहे हैं।

आज का भारत संवाद, विश्वास और सहभागिता के माध्यम से लोकतंत्र को और अधिक सुदृढ़ कर रहा है। यही एक परिपक्व लोकतंत्र और संवैधानिक शासन की पहचान है।

लेखक : श्री राहुल कुमार डागर, हरियाणा के माननीय राज्यपाल प्रोफेसर अशीम कुमार घोष के पीए