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किसानों के सशक्तिकरण से ही सशक्त होगा न्यू इंडिया

MyGov Team
26 Feb 2018

नरेंद्र मोदी सरकार ने हमेशा गरीबों, किसानों और ग्रामीण वर्ग पर विशेष ध्यान दिया है, इस वर्ष के बजट से भी यह प्रतिबद्धता झलकती है। इसी क्रम में किसानों के कल्याण से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों की पहचान करने और उनका उपयुक्त समाधान खोजने के लिये 20 फरवरी को दिल्‍ली के पूसा स्थित एनएएससी परिसर में  सम्मेलन का आयोजन किया गया है। ‘कृषि-2022: किसानों की आय दोगुनी करने’ विषय पर आयोजित इस राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार के प्रमुख कृषि एजेंडे और सुधारों का जिक्र किया। इस संदर्भ में उन्‍होंने इन चार पहलुओं का उल्‍लेख किया: खेती की लागत घटाना, उपज का उचित मूल्‍य सुनिश्चित करना, उपज की बर्बादी रोकना और आदमनी बढ़ाने के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत सृजित करना। प्रधानमंत्री ने बात पर जोर दिया कि उनकी सरकार इन लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है और अब इसका असर भी दिखना शुरू हो गया है।

सम्मेलन में देशभर के किसानों के अलावा किसान संगठनों के प्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री और नीति निर्धारकों ने  हिस्सा लिया। इन्हें संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक अध्‍ययन से यह संकेत मिला है कि सॉयल हेल्थ कार्डों के उपयोग से जहाँ एक ओर रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में कमी आई है, वहीं दूसरी ओर उत्‍पादन बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि सॉयल हेल्थ कार्ड के आधार पर खेती करने की वजह से केमिकल फर्टिलाइजर के इस्तेमाल में 8 से 10 प्रतिशत की कमी आई है और उत्पादन में भी 5 से 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

उन्‍होंने दाल उत्‍पादन में उल्‍लेखनीय बढ़ोतरी के लिए देश के किसानों की भी भूरि-भूरि सराहना की और कहा कि ” ये हमारे देश के किसानों का सामर्थ्य है कि सिर्फ एक साल में देश में दाल का उत्पादन लगभग 17 मिलियन टन से बढ़कर लगभग 23 मिलियन टन हो गया है”। किसानों को उपज का उचित कीमत मिल सके इसके लिए मौजूदा बजट में विशेष ध्यान रखा गया। अब किसानों को सभी खरीफ और रबी फसलों के लिए उत्पादन लागत से कम से कम डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मिल सकेगा।

किसानों के लागत में कमी और बचत को बढ़ाने की दिशा में भी सरकार कई प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री ने बताया कि दो-तीन दशकों से अटकी हुईं देश की 99 सिंचाई परियोजनाओं को तय समय में पूरा किया जाएगा। इसके लिए 80,000 करोड़ रुपए से अधिक का प्रावधान किया गया। इस साल के अंत तक लगभग 50 योजनाएं पूरी हो जाएंगीं और बाकी अगले साल तक पूरा करने का लक्ष्य है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के जरिए अब तक 20 लाख हेक्‍टेयर कृषि भूमि को सूक्ष्‍म सिंचाई के दायरे में लाया गया है। पूरी होती हर सिंचाई परियोजना देश के किसी न किसी हिस्से में किसान का खेती पर होने वाला खर्च कम कर रही है।

सोलर एनर्जी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किसानों की आय बढ़ाएगा। इसी को ध्यान में रखते हुए पिछले तीन साल में सरकार ने लगभग पौने तीन लाख सोलर पंप किसानों के लिए स्वीकृत किए हैं। लगभग ढाई हजार करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।  यूरिया की सौ प्रतिशत नीम कोटिंग की वजह से यूरिया की क्षमता बढ़ी है और ये सामने आ रहा है कि अब उतनी ही जमीन के लिए किसानों को कम यूरिया डालना पड़ता है। कम यूरिया डालने की वजह से पैसे की बचत और ज्यादा पैदावार की वजह से किसानों को पहले की अपेक्षा अधिक कमाई हो रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार कृषि क्षेत्र के कामकाज की व्यवस्था को बदल एक नए कल्चर की स्थापना कर रही है ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो और उन्हें नुकसान से बचाया जा सके। खेत से लेकर बाजार तक पहुंचने के बीच फसलों-फलों-सब्जियों की जो बर्बादी होती है, उसे रोकने के उपायों पर भी सरकार लगातार प्रयास कर रही है। किसान की उन्नति हो, किसान की आमदनी बढ़े, इसके लिए ‘बीज से बाजार तक’ फैसले लिए जा रहे हैं ताकि कृषि के साथ-साथ किसानों का भी विकास हो। GrAM के तहत देश के 22,000 ग्रामीण हाटों को जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ उन्‍नत बनाया जाएगा और उन्‍हें ई-नाम प्‍लेटफॉर्म से एकीकृत किया जाएगा। इससे किसानों को अपनी भूमि से 5 किलोमीटर से लेकर 15 किलोमीटर के दायरे में बाजारों से खुद को जोड़ने की सुविधा मिलेगी। किसान अपने क्षेत्र में, अपने स्तर पर छोटे-छोटे संगठन बनाकर भी ग्रामीण हाटों और बड़ी मंडियों से जुड़ सकते हैं।

किसानों को समय पर और आसानी से ऋण मिल सके, इसके लिए कृषि ऋण के लिए मंजूर की गई धनराशि बढ़ा दी गई है। इसके लिए पिछले तीन वर्ष में कर्ज दी जाने वाली राशि साढ़े 8 लाख करोड़ रुपए से बढ़ाकर इस बजट में 11 लाख करोड़ रुपए कर दी गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि फसल बीमा योजना के तहत 11 हजार करोड़ रुपये के दावों का निपटारा भी किया गया है जो पिछली राशि से दोगुनी है।

प्रधानमंत्री मोदी का मानना है कि जब किसान सशक्त होगा तभी देश भी सशक्त होगा। किसानों को लेकर सरकार का दृष्टिकोण केवल आजीविका के साधन की व्यवस्था करना ही नहीं है। बल्कि सरकार का लक्ष्य कृषि को और अधिक लाभदायक और विश्वसनीय बनाना है ताकि देश के किसानों को उनका वास्तविक हक मिले। इसके लिए गाँवों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि सही मायने में न्यू इंडिया का सपना साकार हो।

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