हक़, हुनर, और हौसला: दिव्यांगजनों के लिए बदला बजट का नज़रिया

Team MyGov
February 12, 2026

केंद्रीय बजट 2026–27: दिव्यांगजनों पर 30% ज्यादा निवेश

केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी को संसद में प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026–27 को दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी दस्तावेज़ के रूप में देखा जा रहा है। दिव्यांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण के लिए काम करने वाले दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) के बजट में लगभग 30 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि न केवल आंकड़ों की बढ़ोतरी है, बल्कि यह उस बदले हुए सरकारी नज़रिये का संकेत है जिसमें दिव्यांगजन अब सहानुभूति के पात्र नहीं, बल्कि अधिकारों के साथ विकास की मुख्यधारा के साझीदार माने जा रहे हैं। वर्ष 2025–26 में ₹1,275 करोड़ के बजटीय प्रावधान को बढ़ाकर वर्ष 2026–27 में ₹1,669.72 करोड़ किया जाना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि सरकार दिव्यांगजनों के समावेशी, गरिमापूर्ण और आत्मनिर्भर भविष्य के प्रति गंभीर है।

देश में दिव्यांगजन आबादी में बीते वर्षों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत दिव्यांगता की श्रेणियों को 7 से बढ़ाकर 21 किए जाने से जरूरतों का दायरा और व्यापक हुआ है। इसी पृष्ठभूमि में बजट 2026–27 में घोषित ‘दिव्यांग सहारा योजना’ को एक निर्णायक हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है, जिसके तहत ALIMCO को आधुनिक, उच्च गुणवत्ता वाले और तकनीक-आधारित सहायक उपकरणों के निर्माण के लिए सशक्त किया जा रहा है।

केंद्र सरकार के मिनीरत्न सार्वजनिक उपक्रम ALIMCO, जिसके पास ISO प्रमाणन, सात विनिर्माण इकाइयाँ और अब तक 35 लाख से अधिक लाभार्थियों का अनुभव है, अब AI-एकीकृत गतिशीलता उपकरणों, ई-ब्रेल तकनीक, श्रवण एवं संज्ञानात्मक सहायक उपकरणों के उन्नत उत्पादन की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ेगा। इसके लिए स्टार्ट-अप्स और वैश्विक तकनीकी संस्थानों के साथ अनुसंधान एवं नवाचार आधारित साझेदारियाँ भी की जा रही हैं, जिससे आयात पर निर्भरता घटेगी और ADIP जैसी योजनाओं के तहत सस्ती व सुलभ सहायता सुनिश्चित होगी।

बजट में प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्रों के उन्नयन और आधुनिक Assistive Technology Mart के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि अंतिम व्यक्ति तक सहायता समय पर और सम्मान के साथ पहुंच सके। इसके साथ-साथ ‘दिव्यांगजन कौशल योजना’ के माध्यम से कौशल विकास को रोजगार से सीधे जोड़ा गया है। यह योजना उन क्षेत्रों पर केंद्रित है जहां भविष्य की संभावनाएं सबसे अधिक हैं—जैसे हॉस्पिटैलिटी सेक्टर, जिसका आकार 2030 तक ₹19–20 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, तेजी से बढ़ता OTT और मीडिया क्षेत्र, तथा ग्रीन जॉब्स जैसे नए अवसर। समावेशी शिक्षण पद्धति, ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण और प्लेसमेंट के बाद सहयोग के ज़रिये यह योजना दिव्यांगजनों के लिए स्थायी आजीविका का रास्ता खोलती है।

मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बजट 2026–27 एक नया भरोसा लेकर आया है। NIMHR, NIEPID और NIEPMD जैसे संस्थानों के सुदृढ़ीकरण, न्यूरो-डाइवर्जेंट व्यक्तियों के लिए उन्नत निदान एवं पुनर्वास सेवाओं तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से दिव्यांग कल्याण को नई ऊँचाई देने की तैयारी है।

कुल मिलाकर, बजट 2026–27 दिव्यांगजनों के लिए रहम या रियायत का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि हक़, हुनर और हौसले के साथ आगे बढ़ने का रोडमैप है। यह बजट कल्याण से सशक्तिकरण की ओर बढ़ते भारत की उस तस्वीर को मजबूत करता है, जहां समावेशी विकास ही विकसित भारत की असली पहचान है।

लेखक – डाo वीरेन्द्र कुमार, केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री